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Home » आम सहित फलदार पेडों को गुजिया कीट से बचायें: डाॅ आरके तिवारी

आम सहित फलदार पेडों को गुजिया कीट से बचायें: डाॅ आरके तिवारी

Dr. Sanjay KumarBy Dr. Sanjay Kumar18/04/2025No Comments3 Mins Read
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आम की डाल गुजिया कीट

ओईनी न्यूज नेटवर्क। 

समस्तीपुर । आम के फल परिपक्वता की तरफ तेजी से अग्रसर हो रहें हैं। लेकिन साथ ही बाग में कुछ कीटों को प्रकोप भी बागों में देखा जा रहा है। उनमें से एक गुजिया कीट (मिली बग) जो आम के पैदावार को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कीट है। जिसका प्रकोप बहुतायत रुप से देखा जा रहा है।डॉ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर के अन्तर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र बिरौली के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ आरके तिवारी ने गुरूवार को आम की पैदावार बढाने केलिए तकीनकी सुझाव जारी करते हुए बताया कि इस कीट के निम्फ (बच्चे) अण्डों से निकलने के तुरंत बाद पेड़ के तने पर चढ़ना प्रारम्भ कर देते है। ये झुण्ड में कोमल शाखाओं, बौर तथा फलों के डंठलों पर देखे जा सकते हैं।

डाॅ तिवारी ने बताया कि गुजिया के अनगिनत निम्फ और वयस्क इन भागों का रस चूस लेते हैं। अत्याधिक रस चूसे जाने के कारण प्रभावित भाग मुरझा कर अंत में सूख जाता है। निम्फ तथा वयस्क एक चिपचिपा द्रव्य भी निकालते है।

वहीं कृषि विज्ञान केन्द्र बिरौली के उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ धीरू कुमार तिवारी ने किसानों को सावधानी बरतने हेतु जानकारी दिया कि गुजिया के मादा कीट, अप्रैल-मई में पेड़ों से नीचे उतर कर भूमि की दरारों में प्रवेश कर सफेद थैलियों में करीब 400-500 तक अंडे देती है। अंडे भूमि में नवम्बर-दिसम्बर तक सुसुप्तावस्था में रहते है।

ये छोटे-छोटे सफेद गुलाबी रंग के बच्चे भूमि में अण्डों से निकल कर दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में आम के पौधों पर चढ़ना प्रारम्भ कर देते हैं। अच्छी धूप निकलने के समय ये अधिक क्रियाशील होते हैं। बच्चे और वयस्क मादा कीट जनवरी से मई तक बौर, फलों के डंठलों एवं नर्म पत्तों से खूब रस चूस कर उनको सूखा देते हैं।

इस कीट से बचाव का सुझाव देते हुए डाॅ तिवारी ने बताया कि गुजिया पेड़ पर चढ़ गई हो तो ऐसी अवस्था में क्लोरोपाइरीफास 20 ई.सी. (2 मिली. प्रति ली. पानी में) अथवा डायमेथोएट 30 ई.सी. (2 मिली. प्रति ली. पानी) का छिड़काव स्टीकर के साथ निम्फ की प्रारम्भिक अवस्था में करना चाहिए। कीटनाशकों का छिड़काव सुबह अथवा शाम को करना ज्यादा प्रभावशाली होता है।कीटनाशक के प्रति सहिष्णुता की स्थिति में कीटनाशक को बदलकर प्रयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बाग की जुताई करके अक्टूबर-नवम्बर माह में खरपतवार एवं अन्य घासों को बागों से निकाल देने से सुसुप्तावस्था में रहने वाले अंडे धूप गर्मी द्वारा नष्ट हो जाते हैं। इसके बाद दिसम्बर माह के तीसरे सप्ताह में वृक्ष के तने के आस-पास क्लोरपाइरीफॉस चूर्ण (1.5ः) 250 ग्राम प्रति वृक्ष मिट्टी में डालने से अण्डों से निकलने वाले निम्फ मर जाते हैं। यदि अल्काथीनध्पॉलीथीन (400 गेज) की 30 सेमी. पट्टी पेड़ के तने के चारों ओर भूमि की सतह से 50 सेमी. ऊँचाई पर दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में गुजिया के निकलने से पहले लपेट दिया जाता है तो निम्फ का वृक्षों पर ऊपर चढ़ना रुक जाता है।

पट्टी के प्रयोग से पहले तने पर मिट्टी के लेप को प्रयोग में लाया जाता है। इसके बाद इसके ऊपर अल्काथीन की पट्टी बाँधी जाती है। पट्टी के दोनों सिरे सुतली से बाँधने चाहिए। इसके बाद थोड़ी ग्रीस पट्टी के निचले सिरे पर लगा कर गुजिया को पट्टी पर नीचे से चढ़ने को रोका जा सकता है।

पट्टी के नीचे वाले खुले तने पर तथा तने के आस-पास क्लोरोपाइरीफॉस को कपड़े की पोटली की सहायता से डालना चाहिए। यह पट्टी बाग में स्थित सभी आम के पेड़ों तथा अन्य वृक्षों पर भी बाँध देनी चाहिए। पॉलीथीन की चादर पर इसके बच्चे, फिसल कर नीचे गिर जाते हैं।

 

 

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