
ओईनी न्यूज नेटवर्क।
समस्तीपुर। समानता, न्याय और बंधुत्व के विचारों से करोड़ों नागरिकों को स्वर और शक्ति देने वाले प्रबुद्ध समाज सुधारक, राष्ट्र प्रबोधक, भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने समाज में समानता, न्याय एवं समरसता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। आजीवन समानता के लिए संघर्ष करने वाले बाबा साहेब समानता और ज्ञान के प्रतीक माने जाते हैं। इसीलिए बाबा साहब की जयंती दिवस को विश्व में समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। भारत रत्न बाबा साहेब डा0 भीमराव अंबेडकर जी की 135वीें जयंती के उपलक्ष्य में मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मंडल रेल प्रबंधक विनय श्रीवास्तव ने उक्त बातें कही।

उन्होंने कहा कि, बाबा साहेब को किसी जाति, धर्म, क्षेत्र, संप्रदाय आदि में बांधकर नही रखा जा सकता है। क्योंकि उन्होंने न केवल शोषित, वंचित व उपेक्षित दबे-कुचले वर्ग को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने के लिए आवाज उठाई। तदनुसार मार्ग प्रशस्त किया और, महिला उत्थान एवं सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी अनेक कार्य किए। जिससे हमारी आर्थिक व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक क्षेत्र में काफी सुधार हुआ।

इस अवसर पर सबसे पहले मरेप्र श्री श्रीवास्तव नें बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके समता, सशक्तिकरण व प्रगति के आदर्शों का स्मरण किया। इस दौरान मंडल के शाखाधिकारियों व अन्य अधिकारियों सहित, यूनियन तथा एससी/एसटी एशोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर उन्हें सादर नमन किया।
मण्डल रेल प्रबंधक ने कहा कि बाबा साहब के जयंती की सार्थकता तभी है जब हम उनके द्वारा स्थापित प्रगतिशील मानवीय मूल्यों का पालन करते हुए देश, और समाज को अधिक समावेशी और प्रगतिशील बनाने की दिशा में निरंतर कार्य करते रहने का संकल्प लें।
